राहु काल क्या है?
राहु काल प्रतिदिन का एक अशुभ समय है, जिसे कोई नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए टाला जाता है। दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है और हर वार को एक अलग भाग राहु काल बनता है। चूँकि यह वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है, Astronaad हर शहर के लिए इसे मिनट तक सटीक गणना करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- राहु काल क्या है?
- राहु काल प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि है जिस पर छाया-ग्रह राहु का प्रभाव माना जाता है। इसे कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए अशुभ माना जाता है। दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है और हर वार को एक अलग भाग राहु काल होता है।
- राहु काल हर शहर में अलग क्यों होता है?
- राहु काल स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से मापा जाता है, जो अक्षांश, देशांतर और तिथि के अनुसार बदलते हैं। इसलिए एक शहर की तालिका दूसरे के लिए ग़लत होती है — हम हर शहर के लिए सूर्य की वास्तविक स्थिति से गणना करते हैं।
- राहु काल में क्या टालना चाहिए?
- परंपरा के अनुसार इस दौरान यात्रा, समझौते, वाहन या संपत्ति की खरीद, विवाह और नए उद्यम आरंभ करना टाला जाता है। पहले से चल रहे सामान्य कार्य अप्रभावित माने जाते हैं।
- राहु काल और अभिजित मुहूर्त में क्या अंतर है?
- राहु काल दिन का एक अशुभ ~90 मिनट का समय है जिसे टाला जाता है; अभिजित मुहूर्त दोपहर के आसपास का शुभ समय है जिसे किसी अच्छी शुरुआत के लिए चुना जाता है।
